क्या अमेरिकी कथित भूमिका ने देश में विभाजन और हिंसा को बढ़ाया? 

ईरान में दिसंबर के अंत से बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए। लोगों ने आर्थिक कठिनाइयों और राजनीतिक असंतोष को लेकर सड़कें भर दीं। 

प्रदर्शनों के बीच देश भर में इंटरनेट कई दिनों तक बंद रहा, जिससे खबर फैलना कठिन हुआ।  

ईरान के सर्वोच्च नेता अयातोल्ला अली खामेनेई ने कहा की यह “अमेरिकी घृणा योजना” है। उन्होंने ट्रंप को “आरोपित” और “दोषी” बताया। 

खामेनेई के अनुसार ट्रंप ने विरोधियों को भड़काया, और प्रदर्शनकारियों को सहायता का संकेत दिया। उन्हें “क्रिमिनल” तक कहा गया। 

ट्रंप ने पहले प्रदर्शनकारियों का समर्थन करने की बात कही थी, लेकिन बाद में शांतिपूर्ण समाधान की उम्मीद जताई। 

अधिकार समूहों के अनुसार 3,000 से ज़्यादा लोगों की मौत हुई 22,000 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया। 

प्रदर्शन केवल आर्थिक मुद्दों तक सीमित नहीं रहे कई लोग शासन परिवर्तन की मांग भी कर रहे हैं। 

यूरोपीय संघ और मानवाधिकार समूह इन दावों और हिंसा की जांच करने का दबाव बढ़ा रहे हैं।  

क्या यह असल में घरेलू असंतोष था, या विदेशी हस्तक्षेप ने आग में घी डाल दिया? आपकी राय?