Jitiya Vrat Kyu Rakha Jata Hai – जितिया पूजा हिंदुओं के महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक है l यह व्रत हर साल अशविन महीने के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि के दिन ही मनाया जाता है l जितिया व्रत को गांव में ज़ुतिया पूजा के नाम से भी जाना जाता है l जितिया पूजा का व्रत विवाहित महिलाएं संतान प्राप्ति और अपने बच्चों की लंबी आयु के लिए करती है l माताओं को यह व्रत रखने से उनकी संतान को अच्छा स्वास्थ्य और जीवन में खूब तरक्की मिलती है l माताएं इस व्रत को पूरे दिन बिना कुछ खाएं पिएं निर्जला व्रत रखती है l आइए इस लेख के माध्यम से जानते हैं, कि जितिया पूजा व्रत क्यों मनाया जाता है और उसके क्या महत्त्व है l
क्यों मनाया जाता है जितिया व्रत ? (Jitiya Vrat Kyu Rakha Jata Hai)

भविष्य पुराण में बताया गया है, कि जितिया व्रत क्यों मनाया जाता है और इसके पीछे क्या कारण है l भविष्य पुराण के अनुसार भगवान शिव जी ने माता पार्वती को जितिया व्रत के बारे में बताया था l भगवान शिव जी ने माता पार्वती से कहा था की जो भी विवाहित महिलाएं इस व्रत को रखती है l उनकी संतान की हमेशा ही रक्षा होती है और उन्हें उनकी लंबी आयु का वरदान भी मिलता है l महिलाओं द्वारा इस व्रत को रखने से उनके संतान पर कोई भी कष्ट और बाधा नहीं आता और उनके संतान के जिंदगी से सारे कष्ट और संकट दूर हो जाती है l द्वापर युग में भी जितिया पूजा का व्रत रखा जाता था l उत्तरा की संतान को जब भगवान श्री कृष्ण ने जीवित्पुत्रिका का नाम दिया था तब से ही इस व्रत को करने की परंपरा शुरू हो गई l
जितिया व्रत का क्या महत्त्व है ?
पुरे भारत में हिंदुओं के त्योहार जितिया व्रत का बहुत ही खास महत्त्व है l इस व्रत को विवाहित महिलाओं द्वारा ही किया जाता है l इसे विवाहित महिलाएं अपनी संतान की दीर्घायु के लिए किया करती है l ताकि उनके पुत्र की आयु लंबी हो l जितिया पूजा का व्रत रखने से उनके संतान की आयु लंबी होती है और उसके ऊपर भगवान श्री कृष्ण की कृपा हमेशा बनी रहती है l विवाहित महिलाएं संतान की सुख प्राप्ति के लिए इस व्रत को रखती है, जो सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है l
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