भारतीय वायु सेना के बेड़े लड़ाकू विमान में राफेल, सुखोई-30 एमकेआई और तेजस जैसे आधुनिक फाइटर जेट्स शामिल हैं।

तेजस और अन्य स्वदेशी विमानों के निर्माण से आत्मनिर्भरता बढ़ी है।

सीमा सुरक्षा और निगरानी के लिए एडवांस्ड ड्रोन और बिना पायलट वाले विमानों का उपयोग हो रहा है।

मिसाइल डिफेंस सिस्टम अग्नि, पृथ्वी जैसी मिसाइलों के साथ सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणालियाँ तैनात हैं।

पायलटों की 2025 में बढ़ती संख्या में वायु सेना में महिला पायलटों की भागीदारी उल्लेखनीय रूप से बढ़ी है।

अत्याधुनिक प्रशिक्षण केंद्र नई तकनीक और सिम्युलेटर के साथ पायलटों को वास्तविक परिस्थितियों का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

अंतरराष्ट्रीय युद्धाभ्यास में वायु सेना ने कई देशों के साथ संयुक्त अभ्यास किए, जिससे रणनीति और तकनीकी ज्ञान बढ़ा।

कृत्रिम बुद्धिमत्ता और साइबर सुरक्षा को वायु सेना की रणनीति में शामिल किया गया है।

भविष्य की जरूरतों के अनुसार हाइपरसोनिक मिसाइलें और स्मार्ट हथियार विकसित किए जा रहे हैं।

भविष्य में भारतीय वायु सेना स्वदेशी उत्पादन, तकनीकी नवाचार और वैश्विक सहयोग के साथ आगे बढ़ रही है।

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